लेटकर नाभि को दबाकर महसूस करें तो
छोटी सी गेंद जैसी कोई चीज़ धड़कती
महसूस होती है,यदि ये धड़कन ठीक नाभि
के नीचे हो तो सही मानी जाती है.यदि
इधर उधर हो तो कब्ज़ ,दस्त की शिकायत
होती है.नाभि हमारे शारीर की ७२०० नाड़ियों
का संगम है ,इसी कारण सारा शरीर प्रभावित
होता है ,धरण ठीक करने के सैकड़ों तरीके
सदियों से प्रभावी रूप में प्रचलित हैं.जिनमें
से सबसे आसन तरीका बता रहा हूँ जो तुरंत
परिणाम देता है .(१)धरण जांचने का तरीका
ये है की अपने दोनों हाथों की रेखाए मिला
कर छोटी उंगली की लम्बाई चैक करे,अंतर
दिखने पर धरण की पुष्टि होती है,तब पीठ
के बल लेट जाएँ,दोनों पैरों को ९० डिगरी एंगल
पर जोड़ें ,आप देखेंगे की एक पैर छोटा है,
एक बड़ा है.ये टली नाभि जांचने के तरीकें हैं.
पुष्टि होने पर इसे ठीक करने के लिए ,
छोटे पैर की टांग को धीरे-२ ऊपर उठायें
६,७,८,९, इंच तक उठायें,फिर धीरे-२ ही
नीचे रखकर लम्बा सांस लें ,यही क्रिया
दो बार और करें,ये क्रिया सुबह शाम ख़ाली
पेट करनी चाहिए .पैरों को
फिर मिलाकर देखें दोनों अंगूठे बराबर
दिखेंगे .यानी आपकी नाभि सही जगह
पर बैठ गयी है.फिर उठकर २० ग्राम गुड,
२० ग्राम सौफ का बनाया चूरन फांक लें
पानी से .इससे पुराणी से पुराणी धरण
आप खुद महिना दो महीने में ठीक कर
सकतें है पेट को कभी भी मसल वाना
आप मुझे फोन भी कर सकतें हैं
(०९४१४९८९४२३)(09414-989-423)
