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FREE होम रेमेडी पूछने के लिए फ़ोन करें 09414989423 ( drjogasinghkait.blogspot.com निशुल्क - मनोरंजन हेतू ब्लोग देखे atapatesawaldrkait.blogspot.com निशुल्क - myphotographydrkait.blogspot.com ) (१)व्यक्ति पहले धन पाने के लिए सेहत बरबाद करता है ,फिर सेहत पाने के लिए धन बरबाद करता है (२)अपने आप को बीमार रखने से बढ कर कोई पाप नहीं है (३)खड़े-खड़े पानी पीने से घुटनों में दर्द की शिकायत ज़ल्दी होती है ,बैठ कर खाने- पीने से घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है (४)भोजन के तुरंत बाद पेशाब करने की आदत बनायें तो किडनी में तकलीफ नहीं होगी (५)ज़बडा भींच कर शौच करने /पेशाब करने से हिलाते हुए दांत/दाड़ पूरी तरहां से जम जाते हैं (६)महत्त्व इस बात का नहीं की आप कितना ऊँचा उठे हैं (तरक्की की ),महत्त्व इस बात का है की आपने कितने लोगों की तरक्की में हाथ बटाया(7)होम रेमेडी और भी हैं ,ब्लॉग विजिट करते रहें मिलते है एक छोटे से ब्रेक के बाद

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गुरुवार, 9 जून 2011

SATSANG BY DR.JOGA SINGH KAIT "JOGI"

  SATSANG BY DR.JOGA SINGH KAIT "JOGI" 
   दिनांक ०५ दिसम्बर २०१० को श्री सुख राम जी द्वारा 
पल्लू में आयोजित सत्संग में डॉ,जोगासिंह द्वारा दिया गया 
=======प्रवचन======= 
आदरजोग गुरूजी श्रीराम प्रकाश जी (जोधपुर वाले),सत्संग में 
दूर-दूर से पधारे सत्संगी भाई,बहनों,बच्चियों और बच्चो आप 
सभी को मेरा सादर प्रणाम .भाई सुख राम जी ने 
श्री रवि तोमर जी के द्वारा सन्देश भेज कर मुझे यहाँ पर 
सत्संग करने योग्य समझ कर आमंत्रित किया ,इनका आभार
व्यक्त करता हूँ ,इनकी कृपा से आदरणीय गुरु जी व ३-४ हज़ार 
सतसंगियों के दर्शन,सेवा व् सानिध्य का अवसर मिला.
मेरा पहला निवेदन ये है कि मैं ना तो कोई संत-महात्मा हूँ,ना 
ही कोई मठाधीश हूँ ,आप में से ही ,आप जैसा एक नागरिक हूँ 
गुरु जी के आदेश,वा आपकी भावनायों कि क़दर करता हुआ 
आपने विचार रखने कि कोशिश करूंगा.बोलते समय यदि कोई
भूल हो जाये तो क्षमा प्रार्थी हूँ .
गुरु जी कि आज्ञा से अपनी बात शुरू करता हूँ,
सबसे पहले मैं आपसे पूछना चाहूंगा कि आप इस पंडाल में क्यों 
बैठें हैं ?(एक सतसंगी का उतर आता है ,सतसंग में बैठें हैं )
दूसरा सवाल है ;यदि पंडाल  में ही सतसंग है तो पंडाल के बाहर
क्या झूठ-संग है ?(मौन),तीसरा सवाल;यदि गुरु के साथ ही सतसंग है 
तो जब आप खेत में पानी लगातें है तब तो गुरु जी पास में नहीं होते ,
क्या तब भी झुठ्संग होता है?शायद कुछ लोग ये स्वीकार करें कि 
एसा नहीं होता .फिर सत्संग की ज़रुरत क्यों पड़ती है ?
सतसंग के बहुत सारे अर्थ हमने बना लिए हैं .
हमने बहुत सारे देवी-देवता भी बनायें है ,सभी ने अपनी-अपनी 
श्रधा -विश्वाश के अनुसार ये व्यवस्थाएं कि है ,दारू पीने वाले ने 
दारू पीने वाला देवता बना लिया ,मांस खाने वाले ने बलि मांगने 
वाला देवता बना लिया ,शाकाहारी ने अपना अलग पूजा स्थान 
बना लिया अर्थात ये सब हमारे मन उत्पन हुए .
एक सवाल मेरे सामने आया कि आखिर धर्म क्या है ?
मेरा छोटा सा ज़वाब था "धरम एक बाड़ की तरह है जो हमारी 
रक्षा करता है "
अब आप ही बताएं जिस धरम को हमने अपने मन के अनुसार 
ढाल लिया तो वो हमारी रक्षा कैसे करेगा ?
ऐसे समय में धर्म हमारी रक्षा नहीं कर पाता अपितु संतों को 
धरम की रक्षा हेतू सतसंग का आयोजन करना पड़ता है जिससे 
धर्म हमारी रक्षा करने के लिए तैयार हो सके 
ये दो काम बहुत ही ज़रूरी हैं लेकिन ,ये करने से पहले ये देख लेना 
ज़रूरी है कि ये दो काम करने वाला शारीरिक - मानसिक रूप से 
कितना बलशाली है .क्यों कि जो आदमी बीमार है वो भोजन तक 
तो कर नहीं पाता ,भजन कैसे कर लेगा .बीमार मरा-मरा तो कर 
सकताहै लेकिन राम-राम करना बहुत ही मुश्किल है.इस देह के 
लिए दो मुख्य काम हैं पहला "भोजन",जिसमें ओ कि मात्रा लगती,
 है.लेकिन भजन में ओ कि मात्रा भी नहीं लगती फिर भी कठिन है 
       यहाँ बैठे कितने लोगों को भोजन करना आता है ?कितनों को 
पानी पीना आता है ?आज कल ये सभ्यता बन गयी है ,खड़े-खड़े 
भोजन करना ,खड़े-खड़े पानी पीना .क्या आप जानतें है ऐसा करके 
हम "दावत" खा नहीं रहे, बीमारियों को "दावत" दे रहें है.
      हमे पता ही नहीं है कि खड़े-खड़े पानी पीने से घुटनों का दर्द 
होगा .क्या खाना है ये तो दूर की बात है,कैसे खाना है ये भी सीखना
,क्यों की इसके बिना शरीर ही तंदरुस्त नहीं होगा ,तो फिर कैसा 
सत्संग ,कैसा धरम ,कैसे  उसका निर्वाह कर पाएंगे .
(दूसरा भाग लगातार ...) 

1 टिप्पणी:

  1. Dr. Joga singh Ji , Old aged persons have got the habit of morning walk and visiting every house. Today , You did walk very early.
    Rest is " BHOJAN BIN TO BHAJAN HOTA NAHIN " , I listened in one satsang. Now I am in your sangat , hence blog addict ho gaya hun , Jhande ginta hun, Han !! I passed Hindi after four attempts.
    Regards

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