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FREE होम रेमेडी पूछने के लिए फ़ोन करें 09414989423 ( drjogasinghkait.blogspot.com निशुल्क - मनोरंजन हेतू ब्लोग देखे atapatesawaldrkait.blogspot.com निशुल्क - myphotographydrkait.blogspot.com ) (१)व्यक्ति पहले धन पाने के लिए सेहत बरबाद करता है ,फिर सेहत पाने के लिए धन बरबाद करता है (२)अपने आप को बीमार रखने से बढ कर कोई पाप नहीं है (३)खड़े-खड़े पानी पीने से घुटनों में दर्द की शिकायत ज़ल्दी होती है ,बैठ कर खाने- पीने से घुटनों का दर्द ठीक हो जाता है (४)भोजन के तुरंत बाद पेशाब करने की आदत बनायें तो किडनी में तकलीफ नहीं होगी (५)ज़बडा भींच कर शौच करने /पेशाब करने से हिलाते हुए दांत/दाड़ पूरी तरहां से जम जाते हैं (६)महत्त्व इस बात का नहीं की आप कितना ऊँचा उठे हैं (तरक्की की ),महत्त्व इस बात का है की आपने कितने लोगों की तरक्की में हाथ बटाया(7)होम रेमेडी और भी हैं ,ब्लॉग विजिट करते रहें मिलते है एक छोटे से ब्रेक के बाद

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सोमवार, 11 जुलाई 2011

dr.kait in sri karan pur

डॉ.जोगा सिंह कैत  "जोगी" की जन्म स्थान यात्रा श्री करण पुर 
(दिनांक ०९-०७-२००११ ) 
श्रीगोपाल कृषण बागी


 के निमंत्रण पर स्कूल में फ्री सेमिनार के लिए बुलावा
 आया तो तुरंत  तैयार हो गया जाने के लिए .वैसे साल में एक बार जरूर 
जाता हूँ .जिन गलियों में बचपन का आन्नद  लिया उनमें घूमकर ताज़गी,
व नयी उर्जा भर कर लौटती गाड़ी से आ जाता था .जिन स्कूलों  में पढ़ा वहा
 भी घूम आता ,अपने पुराने घरों को देखना
janam sthan wale ghar ke samane dr.kait 

joga singh ka janam sthan golbazar 


 ,पुराने लोगों को देखना ,जिनकी 
गोद में खेले जो अब ८० पार के हो चुकें हैं.अभी भी काम कर रहें हैं .ये सब 
देखकर मानों मैं अपना बुढ़ापा वहां छोड़ आता हूँ और बचपन वहां से ले आता हूँ .
शायद इसी  कारण आज भी अपने आप को बच्चा महसूस करता हूँ.और दिन भर
 अच्छी दिनचर्या का पालन कर लेता हूँ .मुझे याद है जब मेरे पिता जी,
श्री साधू सिंह जी  मेरी उंगली पकड़ कर नगरपालिका (पिता जी दो बार पार्षद 
भी रह चुकें हैं)  में रेडिओ सुनाने ले जाते थे, .वो आज भी खंडहर  की स्थिति में
 आज भी खड़ा है .इसकी फोटो व जानकारी राजस्थान पत्रिका के 
redio ghar ke samane dr.kait
श्री परवीन राजपाल ने छापी तो मैंने तुरंत ब्लॉग पर लगायी .और इस यात्रा में
srikaranpur me redio ghar
 उनके घर जाकर बधाई देकर आया


dr.kait,praveen rajpal


 .इस यात्रा में पिता जी के समकालीन
 सिर्फ एक ही साथी मिले जो इस समय ९० साल की उम्र के है श्री प्रीतम सिंह जी
 .अभी भी उसी प्रकार खुस ,स्वस्थ नाम बताते ही बोले "जोगी" हैं ना यूँ बोल ,
गले लगाकर मानों उन्होंने अपनी व मेरी ना जाने कितनी हसरतें पूरी कर ली.
 श्री प्रीतम सिंह जी

 एक कलासफैलो हरभगवान रेडिओ की दुकान खोले बैठा मिला .
पहचान लेने केबाद  हाथ मिलाने से इंकार कर दिया ,जी भर कर गले मिला




 .वरिष्ट साहित्यकार व ज्ञान ज्योति स्कूल के प्रिंसिपल श्री जनक राज परिक के निवास पर मिले तो 
मानों वे आश्चर्य चकित हो गए .खूब बातें हुयी चाय  के बाद विदा ली .और पहुँच
 गए टीचर नरेश के घर वे भी अचानक आगमन पर खुश हुए
dr. kait visited sh.naresh `s school in moudan village












 इनके परिवार ने मेरे पिता जी के बनाये रविदास मंदिर के काम को नए सिरे से आगे बढाया .
जो बस्ती पिता जी ने पार्षद होते स्वीकृत करवाई थी उसी में मंदिर बनवाया .
सामने पार्क में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति भी लगवाई,उस समय भी मुझे 
बुलाया था.हम सपरिवार साक्षी बने थे .तीन स्कूलों में सेमिनार करके,
व जन्म भूमि को नमन करके शाम को सूरत गढ़ लौट आये .अब बड़ी
 रेल-लाइन शुरू होने पर पहले दिन उस रेल में यात्रा करेंगें .




बचपन में तो मैंने छुक-छुक करते भाप वाले इंजन को ही देखा था 

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