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बुधवार, 8 अगस्त 2012

क्या उपवास है लंबी उम्र, अच्छी सेहत का नुस्ख़ा?


क्या उपवास है लंबी उम्र, अच्छी सेहत का नुस्ख़ा?

 मंगलवार, 7 अगस्त, 2012 को 19:46 IST तक के समाचार
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर नियंत्रित तरीके से कुछ समय का उपवास रखा जाए तो इससे न सिर्फ बढ़ते वजन को घटाने बल्कि तमाम स्वास्थ्य संबंधी फायदे हो सकते हैं.
कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि उपवास रखना अकसर कष्टदायक होता है और इसका लंबे समय में कोई फायदा नहीं होता है. इसलिए जब मुझसे भूखा रहकर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए कहा गया तो मैं कतई उत्साहित नही था.
लेकिन 'हॉराइजन' (बीबीसी टीवी का एक कार्यक्रम) के संपादक ने मुझे भरोसा दिलाया कि ये एक नया विज्ञान है और इससे शायद मुझे अपने शरीर में आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिलें.
मुझमें इतनी आत्मशक्ति नहीं थी कि मैं लंबे समय तक बिना खाए- पिए रह सकूं, लेकिन मुझमें इस बात का कारण खोजने की बेहद दिलचस्पी थी कि आखिर कम खाने से क्यों जीवन की अवधि बढ़ जाती है.
प्रोफेसर वाल्टर लौंग इंसानों में हार्मोन की कमी पर शोध कर रहे हैं.
हम 1930 से ही उस प्रयोग के बारे में जानते हैं जिसमें पाया गया था कि कम कैलोरी पर पल रहे चूहे उन चूहों की तुलना में ज्यादा दिन तक जिन्दा रहे जिन्हें पौष्टिकता से भरपूर भोजन दिया गया था.

हार्मोन आईजीएफ-1

स्तनधारियों में जीवन अवधि बढाए जाने का विश्व रिकार्ड एक नई प्रजाति के चूहे का है जिसकी उम्र 40 फीसदी तक बढ़ सकती है. इस हिसाब से मनुष्य एक सौ बीस वर्ष की उम्र पा सकता है.
ये चूहे अनुवांशिक रुप से संवर्धित थे इसलिए इसके शरीर में बहुत ही कम मात्रा में उस हार्मोन आईजीएफ-1 का स्राव होता है जो उम्र बढ़ने के असर को बढ़ाता है.
शरीर में जितने अधिक आईजीएफ-1 हार्मोन का स्राव होगा उसका असर उम्र पर उतना ही अधिक होगा.
ये हार्मोन उस समय के लिए तो बहुत अच्छा है जब कोई बच्चा बढ़ रहा होता है, लेकिन उसके बाद की उम्र के लिए ये हार्मोन अच्छा नहीं है.

प्रोफेसर वाल्टर लौंग

"जैसे ही शरीर में आईजीएफ -1 हार्मोन का स्तर कम होता है तो इसका असर शरीर पर होता है और मरम्मत करने वाले कई जीन शरीर में सक्रिय हो जाते हैं"
पर इस हार्मोन आईजीएफ-1 के स्तर को उपवास रखकर घटाया जा सकता है. इसके पीछे की वजह शायद ये हो सकती है कि जब खाना खाना बंद कर दिया जाता है तो ये हार्मोन शरीर की वृद्धि की जगह उस शरीर में आ रही कमी को दुरुस्त करने लगता है.

अभी प्रमाणिक नहीं

दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ता प्रोफेसर वाल्टर लौंग कहते हैं कि जैसे ही शरीर में आईजीएफ-1 हार्मोन का स्तर कम होता है तो इसका असर शरीर पर होता है और मरम्मत करने वाले कई जीन शरीर में सक्रिय हो जाते हैं
कहा जाता है कि शरीर में आईजीएफ-1 की बहुत कम मात्रा से इंसान बौना रह जाता है लेकिन वो बढ़ती उम्र से जुड़े दो प्रमुख रोगों कैंसर और मधुमेह से सुरक्षित रहते हैं.
हांलाकि मेडिकल आधार पर उपवास के फायदे अभी तक सिद्ध नही हैं और इस तरह के काफी शोध ऐसे है जो कहते है कि एक व्यक्ति को कम से कम दिन में दो हज़ार कैलोरी की जरुरत होती है.
तो ऐसे में अगर आप उपवास रखते हैं तो ऐसा डॉक्टरों के निरीक्षण में करें क्योंकि गर्भवती महिलाओं और मधुमेह के मरीज़ो के लिए ये खतरनाक भी हो सकता है.
कुलमिला कर संतुलन सबसे अच्छा रास्ता है चाहे खाने में हो या फिर उपवास में.

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (18-08-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक संतुलित आलेख विवेक पूर्ण विवेचना और सावधानी से भरपूर सबके लिए एक मायने नहीं हैं उपवास के ....
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    शुक्रवार, 17 अगस्त 2012
    गर्भावस्था में काइरोप्रेक्टिक चेक अप क्यों

    उत्तर देंहटाएं
  3. Dr. Joga Kant Sir, फिर से एक बार आपका ब्लॉग पढ़ने का शुभावसर मिला!:-)
    जहाँ तक मेरा ख़याल है...ज़्यादा देर तक खाली पेट रहने से एसिडिटी (Acidity) होती है व मेटबॉलिज़म (Body Metabolism) भी बिगड़ता है, जो ठीक नहीं है! उपयुक्त एक्सरसाइज़ (Exercise) व थोड़े अंतराल में हल्का, संतुलित पौष्टिक आहार लेने से...हमारा शरीर स्वस्थ व चुस्त-दुरुस्त रहता है ! इसलिए...हमें खाते पीते स्वस्थ रहना चाहिए...:))
    ~सादर !!!

    उत्तर देंहटाएं